"Brahmachari Girish Ji Honoured at Dharma Sanskriti Mahakumbha 2016"
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Mahamedia Magazine - March 2019


Mahamedia Magazine - March 2019
शांतिपूर्ण समाधान श्रेष्ठतम है
पुलवामा में भारतीय वीर जवानों की षड़यन्त्रपूर्वक हत्या से हम सब भारतीय स्तब्ध हैं, दु:खी हैं और आक्रोश में हैं। हमारे शहीद बन्धुओं की कुबार्नी व्यर्थ नहीं जाये, हम सब चाहते हैं। हम नमन करते हैं और अपनी श्रद्धांजली उन्हें अर्पित करते हैं। प्रश्न यह है कि आगे इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने वालों पर हम क्या कार्यवाही करें? पहली बात तो यह है कि हमारी सेना और सुरक्षा बल बहुत अधिक सावधान रहें। उनके परिसर पूरी तरह सुरक्षित किये जायें, उनकी यात्रा की जानकारी पूर्णत: गोपनीय हो, उनके कानवाय के निकलते समय मार्ग का ट्रॉफिक रोका जाये। बहुत बड़ी संख्या में मूवमेंट न हो। अन्य तरीके सेना हमसे अधिक जानती है। भारतीय वैदिक विज्ञान में "हेयम् दु:खम् अनागतम्" का बहुत बड़ा सिद्धांत दिया गया है। अंग्रेजी में भी prevention is better than cure की बात कही गई है। भारत सरकार इन सिद्धांतों और वैदिक तकनीकों का प्रयोग करे तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। परम पूज्य महर्षि महेश योगी जी के इन सिद्धांतों पर वैज्ञानिकों ने अनुसंधान करके यह सिद्ध कर दिया है कि "तत्सन्निधौ वैरत्याग:" के सिद्धाँत और इसके प्रयोग से हम शत्रु में शत्रुता का भाव मिटा सकते हैं। हमें यह प्रयोग करने चाहिये। दुर्भाग्य यह है कि हमारे देश की सरकारों को विदेशी हथियारों पर अधिक विश्वास रहा है, अपने भारतवर्ष की शाश्वत सनातन सुरक्षा तकनीकों पर नहीं। वैज्ञानिकों ने प्रमाणित किया है कि यदि विश्व के किसी भी एक स्थान पर विश्व की जनसंख्या के एक प्रतिशत के वर्गमूल बराबर व्यक्ति नित्य प्रात: और संध्या समय महर्षि जी प्रणीत भावातीत ध्यान, पतंजलि के योग सूत्रों पर आधारित सिद्धि कार्यक्रम और यौगिक उड़ान का अभ्यास करें तो विश्व की सामूहिक चेतना सतोगुणी हो जाती है और सभी प्रकार की नकारात्मक प्रवृत्तियों का शमन होकर सकारात्मक प्रवृत्तियों का उदय होता है।
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