"Brahmachari Girish Ji Honoured at Dharma Sanskriti Mahakumbha 2016"
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Mahamedia Magazine - April - May 2020


Mahamedia Magazine - April - May 2020
' सरकार ने 'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र' ट्रस्ट को सरकारी हस्तक्षेप से दूर रखने और कार्यमें पूरी स्वतंत्रता देने का सशक्त व्यवस्था कर दी है। ट्रस्ट को सारी वित्तीय स्वायत्तत्ता दी गई है, किंतु इसकी किसी भी अचल संपत्ति को किसी भी स्थिति में बेचने का अधिकार नहीं होगा। सरकार ने अभी ट्रस्ट के सदस्यों की घोषणा की है। ट्रस्ट के सदस्यों को अपने बीच से अध्यक्ष, महासचिव और कोषाध्यक्ष के चयन की छूट दी गई है। फंड जुटाकर भव्य राम मंदिर का निर्माण करने से लेकर पूरे तीर्थ के विकास और रखरखाव के प्रशासनिक तंत्र के विकास और पुजारियों की नियुक्ति ट्रस्ट के विशेषाधिकार में रखा गया है। हिंदू पक्ष के वकील के.परासरन ट्रस्ट के आजीवन सदस्य बने रहेंगे।
तीर्थ नगरी के विकास का उत्तरदायित्व- ट्रस्ट को अयोध्या को एक तीर्थ नगरी के रूप में विकसित करने का पूर्ण उत्तरदायित्व सौंपा गया है, जिसमें धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक सुविधाओं का भी प्रबंध हो। बड़ी संख्या में तीर्थ यात्रिायों के आवागमन को देखते हुए बड़े पार्किंग स्थल, यात्रियों के रहने-ठहरने के लिए आवासीय परिसर, खाने-पीने के प्रबंध, यात्रियों की सुरक्षा का पुख्ता प्रबंध, अयोध्या की परिक्रमा वाले पथ की देखभाल सम्मिलित है। इसके साथ ही ट्रस्ट अयोध्या में भगवान राम से संबंधित प्रदर्शनी और संग्रहालय भी स्थापित करेगा। "
1992, 5 दिसंबर: विवादित ढांचे को ढहाया गया। 1993, 3 जनवरी: विवादित स्थल में भूमि अधिग्रहण की लिए केंद्र ने अयोध्या में निश्चत क्षेत्र अधिग्रहण कानून पारित किया। 1994, 24 अक्टूबर: सुप्रीम कोर्ट ने मामले में कहा कि मस्जिद इस्लाम से जुड़ी हुई नहीं है। 2002 अप्रैल: हाई कोर्ट में विवादित स्थल के मालिकाना हक को लेकर सुनवाई प्रारंभ। 2003, 13 मार्च: सुप्रीम कोर्ट ने असलम उर्फ भूरे मामले में कहा, अधिग्रहीत स्थल पर किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं है। 2010, 30 सितंबर: हाई कोर्ट ने विवादित क्षेत्र को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निमोर्ही अखाड़ा और रामलला के बीच तीन भागों में बांटने का आदेश दिया। 2011, 9 मई: सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या भूमि विवाद में हाई कोर्ट के निर्णय पर रोक लगाई। 2016, 26 फरवरी: सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर विवादित स्थल पर राममंदिर बनाए जाने की मांग की। 2017, 21 मार्च: सीजेआइ जेएस खेहर ने संबंधित पक्षों के बीच अदालत के बाहर समाधान का सुझाव दिया। 7, अगस्त: सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यीय पीठ का गठन किया जो 1994 के इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। 8 अगस्त: उत्तर प्रदेश शिया केंद्रिय वक्फ बोर्ड ने सुप्रीप कोर्ट से कहा कि विवादित स्थल से उचित दूरी पर मुस्लिम बहुत क्षेत्र में मस्जिद बनाई जा सकती है। 11 सितंबर: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश दिया कि दस दिन के अंदर दो अतिरिक्त जिला न्यायाधीषों की नियुक्ति करें, जो विवादित स्थल की यथास्थिति की निगरानी करें। 20 नवंबर: यूपी शिया केंद्रीय वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि मंदिर का निर्माण अयोध्या में किया जा सकता है और मस्जिद का लखनऊ में। 2018, 8 फरवरी: सिविल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई प्रारंभ की। 14 मार्च: सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका सहित सभी अंतरिम याचिकाओं को निरस्त किया। 29 अक्टूबर: सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई उचित पीठ के समक्ष जनवरी के पहले हμते में तय की, जो सुनवाई के समय पर निर्णय करेगी। 2019, 8 जनवरी: सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ का गठन किया, जिसकी अध्यक्षता प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने की। इसमें न्यायमूर्ति एसए बोबड़े, न्यायमूर्ति एनवी रमन्ना, न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ सम्मिलित थे। 25 जनवरी: सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय संविधान पीठ का पुनर्गठन किया। नई पीठ में प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एसए बोबडे, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एसए नजीर सम्मिलित थे। 2 अगस्त: सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता विफल होने पर छह अगस्त से प्रतिदिन सुनवाई का निर्णय किया। 6 अगस्त: सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिदिन के आधार पर भूमि विवाद पर सुनवाई प्रारंभ की। 4 अक्टूबर: अदालत ने कहा कि 17 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी कर 17 नवंबर तक निर्णय सुनाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष को सुरक्षा प्रदान करने के लिए कहा। 16 अक्टूबर: सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर निर्णय सुरक्षित रखा। 9 नवंबर: सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने एकमत से रामलला के हक में निर्णय सुनाया। 2020, 5 फरवरी: राममंदिर निर्माण के लिए श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन।
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