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Mahamedia Magazine - February 2020


Mahamedia Magazine - February 2020
मृत्युकारक रोग की श्रेणी मेंं प्रमुखता से सम्मिलित कैंसर पर अब एक सीमा तक नियंत्रण पाया जाने लगा है। इस सफलता की एक कारण इसके प्रति बढ़ी जागरूकता भी है। चार फरवरी को कैंसर दिवस हैं जिस अवसर पर कैंसर और इससे बचाव के बारे में जानते हैं। कैंसर के कारण से लोगों को अपनी जीवन में मानसिक, सामाजिक और आर्थिक कठिनाई झेलनी पड़ती है। यही कारण है कि अनुसंधानकर्ता लंबे समय से कैंसर को हराने की प्रयासों में जुटे हैं। कैंसर सर्जन और एंटी- टोबैको एक्टिविस्ट कहते हैं कि कैंसर के अधिकांश शिकार लोग 30 वर्ष की आयु के बाद के होते हैं। स्पष्ट है कि जीवनशैली में आए परिवर्तन के कारण 30 वर्ष की आयु के बाद आहार का प्रभाव हमारे शरीर पर दिखने लगता है। स्थिति यह है कि कैंसर की बढ़ती संख्या के कारण भारत विश्व में छठे स्थान पर पहुंच गया है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की रिपोर्ट के आधार पर विशेषज्ञों ने कहा कि भारत में प्रतिवर्ष लगभग आठ लाख कैंसर के नए मामलों की पहचान की जाती है, जिसमें अकेले सिर और गले के कैंसर के साढ़े पांच लाख मामले हैं।
क्या होता है कैंसर- चिकित्सालय के कैंसर रोग विशेषज्ञ कहते हैं कि शरीर के किसी भी भाग पर ऊतकों में असामान्य रूप से गांठ का उभरना कैंसर हो सकता है। इस रोग को अलग- अलग श्रेणी में रखा जा सकता है। ये श्रेणियां शरीर के भाग के अनुसार निर्भर करती हैं। कैंसर सामान्य रूप पर सेल्स में उत्पन्न होता है और टिश्यू तक फैल जाता है। कैंसर में अतिरिक्त बनने वाले सेल्स शरीर में टिश्यू का ढेर बना देते हैं और इस विकास को ट्यूमर कहते हैं। यह ट्यूमर कैंसर में परिवर्तित हो सकता है। यहां यह जानना भी आवश्यक है कि शरीर में उपस्थित सभी ट्यूमर कैंसर नहीं होते, बल्कि ट्यूमर कैंसर का रूप ले सकते हैं। प्राय: पर शरीर के किसी भी भाग पर ऊतकों में असामान्य रूप से गांठ बनना या उभार आना कैंसर हो सकता है। कोशिकाओं का असामान्य रूप से वृद्धि करना और अनियंत्रित रूप में विभाजित होना कैंसर होता है।
महिलाओं में बढ़ता कैंसर- भारत में सबसे अधिक महिलाएं कैंसर गर्भाशय कैंसर और गॉल ब्लैडर के कैंसर की शिकार होती हैं। विशेषकर उत्तर भारतीय महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर बहुत शीघ्रता से बढ़ रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि दिल्ली जैसे शहर की 70 प्रतिशत महिलाएं सर्वाइकल कैंसर के बारे में जागरूक नहीं है। मेट्रो शहरों में स्तन कैंसर और ओवरी के कैंसर के मामले भी निरंतर बढ़ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, महिलाओं में जितने भी प्रकार के कैंसर होते हैं, उनमें डिबग्रंथि या ओवेरियन कैंसर आठवां सबसे आम कैंसर है। मृत्यु दर के मामले में इसका स्थाना पांचवा है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अनुसार शीघ्र मृत्यु होने का मुख्य कारण यह है कि अंतिम समय तक अनेक महिलाओं में इस रोग के लक्षण प्रकट ही नहीं होते।
पुरुषों में कैंसर- एक अनुमान के अनुसार पुरुषों में कैंसर से होने वाली मृत्यु में 31 प्रतिशत फेफड़े के कैंसर, 10 प्रतिशत प्रोस्टेट, आठ प्रतिशत कोलोरेक्टल, छह प्रतिशत पैंक्रिएटिंक और चार प्रतिशत लिवर कैंसर से होती हैं। इसलिए इसके प्रारंभिक लक्षणों को अनदेखा न करें। कैंसर के प्रारंभिक लक्षणों को अगर पहचान लिया जाये तो इस संकटकालीन स्थिति तक पहुंचने से रोका जा सकता है। प्रारंभिक अवस्था में पहचान होने के बाद इसके उपचार में सरलता भी होती है।
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