"Brahmachari Girish Ji Honoured at Dharma Sanskriti Mahakumbha 2016"
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Mahamedia Magazine - January 2020


Mahamedia Magazine - January  2020
महर्षि महेश योगी का जन्म 12 जनवरी 1917 को छत्तीसगढ़ के राजिम शहर के पास पांडुका गाँव में हुआ। उनका मूल नाम महेश प्रसाद वर्मा था। उनकी बचपन की यादें जबलपुर की फिजां में घुली हुई हैं। विदेश जाने के बाद भी जबलपुर से उनका आत्मीय लगाव रहा। भेड़ाघाट की संगमरमरी वादी का आकर्षण तो उन्हें इतना पसंद था कि जबलपुर आगमन पर उन्होंने रात 1 बजे भेड़ाघाट जाकर नौकायन किया था। वे सदैव कहते थे कि नर्मदा का तट तपोस्थली है। इसके किनारे पर वो जादू है, जो अन्यत्र देखने नहीं मिला। वे ब्रम्ह मुर्हूत आने तक वादियों की ओर देखते और उसके आकर्षण में खोए रहते। इसके अतिरिक्त दुनिया को भावातीत ध्यान की सौगात देने वाले महर्षि महेश योगी का बचपन संस्कारधानी में बीता।
शिक्षा-दीक्षा भी यहां हुई। स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती जी के संपर्क में आने के बाद महर्षि ने परिवार का मोह त्याग दिया और 1940 को वे घर से चले गए। उन्होने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से भौतिकी में स्नातक की उपाधि भी अर्जित की। उन्होने तेरह वर्ष तक ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती के सानिध्य में शिक्षा ग्रहण की। हिमालय क्षेत्र में तीन वर्ष का मौन व्रत करने के बाद वर्ष 1956 में उन्होने टीएम तकनीक की शिक्षा देना आरम्भ की। वर्ष 1957 में उनने टीएम आन्दोलन आरम्भ किया और इसके लिये विश्व के विभिन्न भागों का भ्रमण किया। महर्षि महेश योगी द्वारा चलाया गए आंदोलन ने उस समय जोर पकड़ा जब रॉक ग्रुप 'बीटल्स' ने 1968 में उनके आश्रम का दौरा किया। इसके बाद गुरुजी का ट्रेसडेंशल मेडिटेशन अर्थात भावातीत ध्यान पूरी पश्चिमी दुनिया में लोकप्रिय हुआ। उनके शिष्यों में पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी से लेकर आध्यात्मिक गुरू दीपक चोपड़ा तक सम्मिलित रहे। महर्षि महेश योगी ने वेदों में निहित ज्ञान पर अनेक पुस्तकों की रचना की। महेश योगी अपनी शिक्षाओं एवं अपने उपदेश के प्रसार के लिये आधुनिक तकनीकों का सहारा लेते रहे हैं। उन्होने महर्षि मुक्त विश्वविद्यालय स्थापित किया जिसके माध्यम से 'आनलाइन' शिक्षा दी जाती है। वे साप्ताहिक वीडियो पत्रकार वार्ता आयोजित करते। वे महर्षि प्रसारण के लिये उपग्रह व अन्तरजाल का सहारा लेते। अपनी विश्व यात्रा की शुरूआत 1959 में करने वाले महर्षि योगी के दर्शन का मूल आधार था, 'जीवन परमआनंद से भरपूर है और मनुष्य का जन्म इसका आनंद उठाने के लिए हुआ है। प्रत्येक व्यक्ति में ऊर्जा, ज्ञान और सामर्थ्य का अपार भंडार है तथा इसके सदुपयोग से वह जीवन को सुखद बना सकता है।'
पश्चिम में जब हिप्पी संस्कृति का बोलबाला था, महर्षि महेश योगी ने 'ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन' (भावातीत ध्यान) के द्वारा दुनिया भर में अपने लाखों अनुयायी बनाए। ब्रिटेन के रॉक बैंड बीटल्स के सदस्य उत्तरी वेल्स में उनके साथ सप्ताहांत व्यतीत करते थे। एक बार जब महेश योगी ऋषिकेष में बनाए गए अपने आश्रम में थे तो बीटल्स के सदस्य हेलिकॉप्टर से वहाँ पहुँचे थे। जब वे अपनी प्रसिद्धि के शिखर पर थे तो कुछ लोगों ने उनसे पूछा कि उन्हें संत क्यों कहा जाता है और उनका उत्तर था, "मैं लोगों को ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन (भावातीत ध्यान) सिखाता हूँ जो लोगों को जीवन के भीतर झांकने का अवसर देता है। इससे लोग शांति और प्रसन्नता के प्रत्येक क्षण का आनंद लेने लगते हैं। चूंकि पहले सभी संतो का यही संदेश रहा है इसलिए लोग मुझे भी संत कहते हैं।" वर्ष 1990 में हॉलैंड के व्लोड्राप गाँव में ही अपनी सभी संस्थाओं का मुख्यालय बनाकर वह यहीं स्थायी रूप से बस गए और संगठन से जुड़ी गतिविधियों का संचालन किया। दुनिया भर में फैले लगभग करोड़ों अनुयाईयों के माध्यम से उनकी संस्थाओं ने आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति और प्राकृतिक तरीके से बनाई गई कॉस्मेटिक व हर्बल दवाओं के प्रयोग को बढ़ावा दिया। 90 के दशक में ब्रिटेन और यूरोप के चुनाव में 'नेचुरल लॉ पार्टी' के उम्मीदवारों की बड़ी चर्चा रही क्योंकि वे योग-ध्यान की बातें करते थे और महर्षि महेश योगी की मान्यताओं के समीप थे। महर्षि योगी पर अनेक पुरस्कार जीतने वाली फिल्म बना चुके बीबीसी के यावर अब्बास ने एक बार ऋषिकेश स्थित उनके आश्रम में उनसे बात की थी। यावर अब्बास ने पूछा कि क्या कारण है कि वे और उनका ध्यान-योग पश्चिमी देशों में बहुत लोकप्रिय है किंतु भारत में उन्हें मानने वाले अधिक नहीं हैं, तो महेश योगी का उत्तर था, "इसकी कारण यह है कि यदि पश्चिमी देशों में लोग किसी चीज के पीछ वैज्ञानिक कारण देखते हैं तो उसे तुरंत अपना लेते हैं और मेरा ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन योग के सिद्धांतों पर कायम रहते हुए पूरी तरह वैज्ञानिक है।" हॉलैंड के व्लोड्राप नगर में महर्षि का वैदिक विश्वविद्यालय- डच के स्थानीय समय के अनुसार एम्सटर्डम के पास छोटे से गाँव व्लोड्राप में स्थित अपने आवास में मंगलवार देर रात उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया।
महर्षि योगी ने ये कहते हुए अपने आपको सेवानिवृत्त घोषित कर दिया था कि उनका कार्य पूर्ण हो गया है और अपने गुरु के प्रति जो कर्तव्य था वो पूरा कर दिया है। महर्षि महेश योगी ने ध्यान और योग से श्रेष्ठ स्वास्थ्य और आध्यात्मिक ज्ञान का वादा किया और दुनिया के अनेक प्रसिद्ध लोग उनसे जुड़ गए। नीदरलैंड्स स्थित उनका विशाल घर एक ओर से पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है और टेलीविजन चैनलों के द्वारा वे दुनिया भर में ध्यान और योग की शिक्षा देते रहे हैं। जैसी कि उनकी संस्था उनके बारे में जानकारी देती है, महेश योगी ने अनेक देशों में पाँच सौ स्कूल खोल रखे हैं, दुनिया में चार महर्षि विश्वविद्यालय हैं और शिक्षण संस्थान हैं।
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