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Mahamedia Magazine - May 2019


Mahamedia Magazine - May 2019
वायु- हमारा शरीर कोशिकाओं से बना होता है और हवा ( ऑक्सीजन) के बिना कोशिकाएं जीवित नहीं रह पातीं। शरीर के सुचारू रूप से कार्य करने के लिए आवश्यक है कि हमारा श्वसन तंत्र ठीक से काम करे। अगर पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलेगी तो भोजन का ऑक्सीडेशन नहीं होगा और न ही ऊर्जा रिलीज होगी।
वायु देव वैदिक देवताओ को तीन श्रेणियों में विभक्त किया गया है पार्थिव , वायवीय एवं आकाशीय। इनमे वायवीय देवो में वायु प्रधान देवता है इसका एक पर्याय बात भी है । वायु, वात दोनों ही भौतिक तत्त्व एवं दैवी व्यक्त्तित्व के बोधक हैं किंतु वायु से विशेष कर देवता एवं वात से आँधी का बोध होता है। ऋग्वेद में केवल एक ही पूर्ण सूक्त वायु की स्तुति में है तथा वात के लिये दो हैं। वायु का प्रसिद्ध विरुद्ध नियुत्वान् है जिससे इसके सदा चलते रहने का बोध होता है। वायु मन्द के सिवा तीन प्रकार का होता है: धूल-पत्ते उड़ाता हुआ वर्षाकर एवं वर्षा के साथ चलने वाला झंझावात। तीनों प्रकार वात के हैं जबकि वायु का स्वरूप बड़ा ही कोमल वर्णित है। ऋग्वेद में केवल एक ही पूर्ण सूक्त वायु की स्तुति में है तथा वात के लिये दो हैं।
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