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Mahamedia Magazine - April 2019


Mahamedia Magazine - April 2019
मैं पृथ्वी हूं, मुझमें ही सब कुछ बसा हुआ है। पेड़-पौधे जो सभी को आॅक्सीजन प्रदान करते हैं और स्वयं कार्बन डाइआॅक्साइड ग्रहण करके जीव-जंतु, मनुष्य को जीवन दान देते हैं वह मेरी ही गोद में जन्म लेते हैं। मनुष्य, जीव, जंतु यह सभी मेरी गोद में ही जन्म लेते हैं। एक प्रकार से मैं इन सबकी माता हूं किंतु बहुत-सी प्रजातियों का विनाश भी मेरे भीतर ही होता है। मेरा आकार गोलाकार है। मेरा जन्म कैसे हुआ इसके बारे में सभी अलग-अलग मत हैं कि मेरा जन्म अंतरिक्ष में हुए जोरदार धमाके से हुआ था। जब धमाका हुआ तो चारों ओर धूल के कण और पत्थर के टुकड़े गुरुत्वाकर्षण की शक्ति की वजह से आपस में जुड़ने लगे और मेरा जन्म हुआ। किंतु धार्मिक लोग ये भी मानते हैं कि मेरा जन्म भगवान के द्वारा हुआ है। मेरा जन्म कैसे भी हुआ हो किंतु मैं सबको जानती हूं। मैं किसी के साथ भेदभाव बिल्कुल नहीं करती। मेरे अंदर सभी को हवा, पानी आदि बराबर मिलता है। मैं किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती। मनुष्य ही मुझे नुकसान पहुंचाकर अपना नुकसान करता है। कहते हैं कि अगर आप अपने ऊपर पत्थर फेंकोगे तो पत्थर आपके ऊपर ही गिरेगा। उसी प्रकार मनुष्य मुझे बहुत नुकसान पहुंचा रहे हैं। आज मुझ में (धरती में) बहुत सारी हानिकारक पॉलीथिन मिलती हैं जो मेरे लिए हानिकारक हैं। मनुष्य अपने थोड़े से लाभ के लिए मेरे अंदर रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग करके मुझे बंजर कर देता है, इससे धरती को बहुत हानि पहुंचती है। आज हम देखें तो मनुष्य ने मेरी इस पृथ्वी पर बहुत सारे प्रदूषण किए हैं जिनमें जल प्रदूषण, वायु प्रदुषण आदि प्रदूषणों के कारण से मनुष्य को बहुत-सी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पृथ्वी के ऊपर बहुत सारे ऐसे वीर और महा योद्धाओं ने जन्म लिया है जिन पर मुझे गर्व है। मेरी गोद में ही दानवीर कर्ण जैसे महादानी ने जन्म लिया है जिनको मैं सदैव याद रखूंगी। मेरी गोद में ही भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लेकर सदैव-सदैव के लिए पापियों का नाश कर दिया है। मैं बहुत ही प्रसन्न हूं कि भगवान मुझ पृथ्वी पर कभी कभार पापियों का नाश करने के लिए जन्म लेते हैं।
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